
रात आती है उसकी सौगाद लाती है
फ़िर से दिल सीने में धड़कने लगता है
और फज्र होते-होते वो चुपके से मुस्कुराकर चली जाती है
ज़िन्दगी फ़िर से मेरी बस वही थम से जाती है
फ़िर से दिल सीने में धड़कने लगता है
और फज्र होते-होते वो चुपके से मुस्कुराकर चली जाती है
ज़िन्दगी फ़िर से मेरी बस वही थम से जाती है
बहुत बढिया!!
ReplyDeleteअपने जज्बात को लफ्ज़ों का जामा पहनाकर पेश करने की अच्छी कोशिश है
ReplyDeleteमेरा मश्वरा है, इन्हे फन का लिबास भी पहना देना चाहिये
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
Me Tujh se kuch nahi maangta khuda..
ReplyDeleteTeri De ke Chhin lene ki aadat mujhe pasand nahi..
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