
ये लाजिम तो नही की हर बात तुझे बताई जाए
कभी चाह कर भी कोई बात तुझसे छिपाई जाए
उस अंदाज़-ए-बयां का क्या फायदा जो गम दे
झूठ ना सही पर सच्चाई भी तो न छिपाई जाए
कभी चाह कर भी कोई बात तुझसे छिपाई जाए
उस अंदाज़-ए-बयां का क्या फायदा जो गम दे
झूठ ना सही पर सच्चाई भी तो न छिपाई जाए
sach aur jhooth me hai bas dekhne ka farq...
ReplyDeleteaaine me dikhti apni jhalak bhi jhooti lagti hai;